नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं बरसी पर एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है। हैदराबाद से लेकर मुर्शिदाबाद तक बाबरी मस्जिद को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। एक तरफ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में नई “बाबरी जैसी मस्जिद” के लिए नींव रखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी का बयान सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा रहा है।
ओवैसी ने 6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस बरसी के मौके पर अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा, “जब तक दुनिया रहेगी, तब तक बाबरी मस्जिद का जिक्र करते रहेंगे।” उनके इस बयान के बाद देशभर की राजनीति में हलचल मच गई है। ओवैसी ने इस मौके पर संघ परिवार पर भी निशाना साधा और कहा कि इतिहास को मिटाने की कोशिश करने वाले सच से नहीं बच सकते।
मुर्शिदाबाद में नई मस्जिद की नींव, ओवैसी के बयान से गूंजा माहौल
मुर्शिदाबाद में बागी विधायक हुमायूं अकबर ने “नई बाबरी जैसी मस्जिद” की नींव रखी है, जिससे स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस घटनाक्रम की चर्चा हो रही है। वहीं हैदराबाद में ओवैसी के बयान को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।
देशभर में गूंजा बाबरी विध्वंस की बरसी का असर
बाबरी विध्वंस की 33वीं बरसी पर यूपी, बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र, झारखंड और तेलंगाना जैसे राज्यों में मुस्लिम समुदाय और सामाजिक संगठनों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कई स्थानों पर शांति सभाएं और चर्चाएं आयोजित की गईं। हालांकि, राजनीतिक दलों के बीच एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
ओवैसी के बयान से बढ़ी बहस
एआईएमआईएम प्रमुख का यह बयान कई राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ नेता इसे ऐतिहासिक न्याय का प्रश्न बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे भावनाओं को भड़काने की कोशिश मान रहे हैं।
33 साल बाद भी बाबरी मस्जिद से जुड़ी बहस भारत की राजनीति और समाज में गहरा प्रभाव रखती है, और इस बार भी 6 दिसंबर का दिन उसी तरह सुर्खियों में रहा।