कोलकाता/मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर नई मस्जिद की नींव रख दी है। इस कदम के बाद राज्य में सियासी हलचल मच गई है। तमाम विरोधों और आलोचनाओं के बीच हुमायूं कबीर का दावा है कि “सभी मुसलमान इस मस्जिद निर्माण में उनके साथ हैं।”
हुमायूं कबीर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मस्जिद निर्माण के चंदे से जुड़ा एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें लोग पैसे गिनते हुए दिखाई दे रहे हैं। उनका दावा है कि अब तक 11 बक्सों में चंदा जमा हुआ है और QR कोड के ज़रिए करीब 93 लाख रुपये उनके बैंक खाते में आए हैं।
CCTV निगरानी में चल रहा फंड का हिसाब
हुमायूं कबीर ने बताया कि पैसे गिनने के लिए 30 लोगों की टीम लगाई गई है और गिनती का काम पूरी तरह CCTV कैमरों की निगरानी में हो रहा है। उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि मस्जिद निर्माण के लिए उन्हें किसी राजनीतिक दल—विशेष रूप से बीजेपी—से फंड मिला है। उन्होंने कहा, “मैंने खुद जनता से चंदा लिया है, यह किसी पार्टी का पैसा नहीं।”
उनका कहना है कि “यह मस्जिद मुसलमानों के योगदान से बनेगी, और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।”
राजनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय, नई पार्टी का ऐलान
TMC से निष्कासित होने के बाद हुमायूं कबीर ने अब अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा भी कर दी है। उन्होंने कहा कि वह 22 दिसंबर को नई पार्टी का गठन करेंगे, जो “मुसलमानों के अधिकारों और समस्याओं पर काम करेगी।”
कबीर ने दावा किया है कि वे 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे और आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में “गेम-चेंजर” बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे AIMIM के संपर्क में हैं और असदुद्दीन ओवैसी से बातचीत जारी है। हालांकि अब तक AIMIM या ओवैसी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
बढ़ता विवाद और सियासी बयानबाजी
मुर्शिदाबाद में मस्जिद की नींव रखे जाने के बाद से ही यह मामला राज्य की राजनीति में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि हुमायूं कबीर का यह कदम आने वाले चुनावों में अल्पसंख्यक वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।