पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हर साल उस दिन को ‘सद्भाव दिवस’ ​​के रूप में मनाती हैं जब विवादित ढांचा गिराया गया था। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का नाम लिए बिना परोक्ष रूप से चेतावनी दी कि निहित स्वार्थों की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी। ममता बनर्जी ने शुक्रवार को जारी एक सोशल मीडिया बयान में कहा, “जो लोग देश को बर्बाद करने के लिए सांप्रदायिकता की आग भड़काने का खेल खेल रहे हैं, उनके खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।” साथ ही, उन्होंने लोगों से राज्य में इस अवसर पर शांति और सद्भाव की विरासत को बहाल करने की अपील की।

ममता बनर्जी का संदेश

मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “एकता ही शक्ति है। सबसे पहले, मैं ‘एकता दिवस’, ‘सद्भाव दिवस’ के अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई देती हूं। बंगाल की धरती एकता की धरती है। यह धरती रवींद्रनाथ की धरती है, नजरुल की धरती है, रामकृष्ण-विवेकानंद की धरती है। इस धरती ने कभी भी बंटवारे के आगे सिर नहीं झुकाया है और न ही आने वाले दिनों में झुकाएगी।” उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध धर्म के लोग कंधे से कंधा मिलाकर रहते हैं और खुशियां बांटते हैं। उनका मानना है कि धर्म किसी का हो सकता है, लेकिन त्योहार सभी के होते हैं।

सद्भाव दिवस का आयोजन

शनिवार दोपहर को तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रिय कोलकाता के एस्प्लेनेड में सालाना ‘सद्भाव दिवस’ कार्यक्रम आयोजित किया जहाँ पार्टी के शीर्ष नेता, युवा और छात्र विंग शामिल हुए।

बाबरी मस्जिद का शिलान्यास

इसी जिले के भरतपुर निर्वाचन क्षेत्र से निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में एक बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया। यह मस्जिद उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मूल निर्माण के अनुरूप होगी।

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